आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा,
आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की?
दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ,
कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा ..
..atr
मुक्तक 7
Comments
4 responses to “मुक्तक 7”
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bahut khoob
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dhanyavad..
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Nice
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Very nice
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