मुक्तक 9

लहरा रहा है सामने यादों का समंदर ,
जो डूबना भी चाहूँ तो किस किनारे से..
मेरे इश्क़ की दास्ताँ बस इतनी है,
तलाश हमसफ़र की थी मुकाम तन्हाई का मिला.
…atr

Comments

3 responses to “मुक्तक 9”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  2. Satish Pandey

    Bahut khoob

  3. Satish Pandey

    Waah

Leave a Reply

New Report

Close