मुफलिसी जहां की जबान

मुफलिसी जहां की बस मैं जबान रखता हूं |
आज हाथ में अपने आसमान रखता हूं |

गौर कर जरा बस्ती पे कभी खुदा मेरे |
हैं गरीब सब तो घर में दुकान रखता हूं |

है खबर जमीं तो तुमने खरीद ली सारी |
आसमान पे , लो अपना मकान रखता हूं |

तुम्हे गर लगाना है आग तो लगा दो , पर |
आँख में जहाँ वालों मै तुफ़ान रखता हूं |

जानते रहे बेईमान है खुदा हम भी |
इसलिए बेईमां के घर पे जान रखता हूं |

काश इश्क का वो आगाज तो करें गर ‘मै |
इक तरफ मुहब्बत ए कद्रदान रखता हूं |

जब यहाँ वहाँ का अरविन्द ने जमीं छोड़ा |
हाथ में तेरे लो ‘ सारा जहान रखता हूं |
❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close