मेरी आवाज दबा दी गयी

मेरी आवाज दबा दी गयी
मेरे अल्फ़ाज मिटा दिये गये
जला दिया मेरा जिस्म भी दुनिया ने
मगर ख्वाहिशे कहां मिटती है
ढ़ूढ़ लेती है कोई न कोई राह
निकल पडती है परत दर परत
मिट्टी में मिलने के बाद
इक नन्हे पौधे की तरह!


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Panna.....Ek Khayal...Pathraya Sa!

5 Comments

  1. UE Vijay Sharma - February 20, 2016, 3:52 pm

    ख्वाहिशे कहां मिटती है ….. Khoob kha Panna Saheb

  2. Lokesh Nashine - February 20, 2016, 7:11 pm

    Nice

  3. Abhishek kumar - November 25, 2019, 9:11 am

    Meri awaaz hi Pehchaan hai

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