मेरी आवाज दबा दी गयी
मेरे अल्फ़ाज मिटा दिये गये
जला दिया मेरा जिस्म भी दुनिया ने
मगर ख्वाहिशे कहां मिटती है
ढ़ूढ़ लेती है कोई न कोई राह
निकल पडती है परत दर परत
मिट्टी में मिलने के बाद
इक नन्हे पौधे की तरह!
मेरी आवाज दबा दी गयी
Comments
5 responses to “मेरी आवाज दबा दी गयी”
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ख्वाहिशे कहां मिटती है ….. Khoob kha Panna Saheb
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thanks
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Nice
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thanks
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Meri awaaz hi Pehchaan hai
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