मौकापरस्त मोहरे

वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की चाल भी बदल गयी थी, घोड़ा तिरछा चल रहा था, हाथी और ऊंट आपस में स्थान बदल रहे थे, वज़ीर रेंग रहा था, बादशाह ने प्यादे का मुखौटा लगा लिया था और प्यादे अलग अलग वर्गों में बिखर रहे थे।

वह चिल्लाया, “तुम सब मेरे मोहरे हो, ये बिसात मैनें बिछाई है, तुम मेरे अनुसार ही चलोगे।” लेकिन सारे के सारे मोहरों ने उसकी आवाज़ को अनसुना कर दिया, उसने शतरंज को समेटने के लिये हाथ बढाया तो छू भी नहीं पाया।

वह हैरान था, इतने में शतरंज हवा में उड़ने लगा और उसके सिर के ऊपर चला गया, उसने ऊपर देखा तो शतरंज के पीछे की तरफ लिखा था – “चुनाव के परिणाम”।


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6 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - February 14, 2020, 7:31 am

    👏👏👏👏

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 14, 2020, 9:14 am

    Nice

  3. Kanchan Dwivedi - February 14, 2020, 9:43 pm

    Good

  4. Priya Choudhary - February 16, 2020, 5:16 pm

    Nice 👏👏

  5. Satish Pandey - July 31, 2020, 1:14 pm

    waah ji waah

  6. Satish Pandey - July 31, 2020, 1:14 pm

    Likhte rahiye, Bahut sundar

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