Chandresh Chhatlani's Posts

मौकापरस्त मोहरे

वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की चाल भी बदल गयी थी, घोड़ा तिरछा चल रहा था, हाथी और ऊंट आपस में स्थान बदल रहे थे, वज़ीर रेंग रहा था, बादशाह ने प्यादे का मुखौटा लगा लिया था और प्यादे अलग अलग वर्गों में बिखर रहे थे। वह चिल्लाया, “तुम सब मेरे मोहरे हो, ये बिसात मैनें बिछाई है, तुम ... »

आइये प्रपोज़ करें

आइये प्रपोज़ करें अनंत ब्रह्माण्डों तक फैले हुए अपने ही ईश्वर को। जो जनक है प्रेम का। आइये प्रपोज़ करें अपनी ही आकाशगंगा को। जिसकी संरचना में कहीं-न-कहीं हम सभी ढले हैं। आइये प्रपोज़ करें अपने ही सूर्य को। रोशन कर देता है जो तन-मन-आत्मा भी। आइये प्रपोज़ करें अपनी ही पृथ्वी को। क्या कुछ नहीं देती जो, ज़रूरत है क्या गिनाने की? आइये प्रपोज़ करें खेतों में उग रही अपनी ही फसल को। हमारा प्रेम पा देखना कैसी खि... »