वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की […]

आइये प्रपोज़ करें अनंत ब्रह्माण्डों तक फैले हुए अपने ही ईश्वर को। जो जनक है प्रेम का। आइये प्रपोज़ करें अपनी ही आकाशगंगा को। जिसकी संरचना में कहीं-न-कहीं हम सभी ढले हैं। आइये प्रपोज़ करें […]