यूं तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे

यूं तेरी रह गुज़र से दीवाना-वार गुजरे
कांधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुजरे

बैठे रहे रस्ते में , दिल का खंडहर सजा कर
शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुजरे

बहती हुई ये नदिया , घुलते हुए किनारे
कोई तो पार उतरे , कोई तो पार गुजरे

तूने भी हमको देखा , हमने भी तुझको देखा
तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुजरे

————————————————————-

yuun teri rahguzar se diwana waar guzre
kandhe pe apne rakh k apna mazaar guzre

baithe rahe hain rasta main dil ka khandar saja kar
shayad isi taraf se ek din bahar guzre

bahti hui ye nadiya ghulte hue kinare
koi to paar utre koi to paar guzre

tuu ne bhi ham ko dekha hamne bhi tujhko dekha
tuu dil hi har guzra ham jaan har guzre


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

I love Poetry !!

1 Comment

Leave a Reply