रिश्‍ते और बर्फ

अक्सर सोचता हूँ
रिश्‍ते क्‍यों जम जाते हैं
बर्फ की तरह |

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सोचता हूँ….

सोचता हूँ, क्यों ये बंदूकें है तनी? उन जीवों पर जो दिखते हूबहू हम जैसे, नेताओं के कठपुतले बन, मात्र खून के कतरे है बहे।…

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