रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं

रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं
और वह अंधेरों में छिपता रहा
तन्हाइयों में खोता गया
और सूरज से आँख मिलाने से डरता रहा

दिन दिन न थे उसके अब
रातों का उसको इंतज़ार रहने लगा
इतना पर्दा बढ़ा
कि ख़ुद से भी वह छुपने लगा

अँधेरे अच्छे लगने लगे धीरे धीरे
दूर जाते रहे उसके जीवन से सवेरे
वह अपने जीवन से दूर जाता रहा
सब कुछ खोता रहा

तभी किसी प्रेरणा से उसने कलम उठा ली
लिखने को अपने जीवन में जगह दी
अवसाद मन के वह कागज़ में उतारने लगा
मन में ज़मी मैलो से मुक्ति पाने लगा

फिर अपने को विस्तार दिया
औरों से खुद को जोड़ लिया
जीवन को गति मिलने लगी
अंधेरों की बदली छटने लगी
रोशनी पर्दों से छन छन कर आने लगी
सूरज की उसको ज़वानी मिली
वह बढ़ने लगा जीवन में
ऊर्जा का प्रवाह होने लगा उपवन में
जीवन के वृक्ष पर विश्वास का फूल खिलने लगा
आशा का फल लगने लगा
वह जीवन में आगे बढ़ने लगा
बढ़ता गया आगे की ओर
चढ़ता गया ऊपर की ओर
कइयों की ज़िंदगियाँ सवारी उसने
कितने ही जीवन में वह लाया भोर

सृजन की उंगली थामे थामे
जीवन का मैराथन जीत लिया उसने
जीवन को सही अर्थ दिया उसने ।

तेज


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Lives in New Delhi, India

3 Comments

  1. Rohan Sharma - April 28, 2016, 9:32 pm

    Achi kavita

  2. Rohan Sharma - April 28, 2016, 9:32 pm

    Achi kavita

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 8, 2019, 5:05 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

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