लफ़्ज

लफ़्ज हो गये है खत्म दास्ता बयां करते करते
कुछ कहते हम अक्सर थम जाते है

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. मोहब्बत की सर्दी शुरू हो गयी है
    अश्क अब आंखों में ही जम जाते है|

  2. नूर जिंदगी से जैसे रूखसत हो गया है
    अंधेरों मैं ही हम अब रम जाते है

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