वक्त

वक्त से मैं बेवक्त उलझता रहा।
वक्त से बड़ा कद समझता रहा।
वक्त ने इस कदर उलझाया मुझे,
वक्त ना वक्त पर सुलझता रहा।

देवेश साखरे ‘देव’


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8 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 11, 2019, 12:34 pm

    जय हो 📌

  2. nitu kandera - November 11, 2019, 4:33 pm

    wah

  3. NIMISHA SINGHAL - November 11, 2019, 8:51 pm

    Wah

  4. Abhishek kumar - November 24, 2019, 9:08 am

    क्या बात

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