मोहब्बत का वह दौर था ,
दिखता नहीं कुछ और था ..
बस हमारे प्यार का सारे जहां में शोर था,
उसने चुराया दिल मेरा ,मन भी मेरा चित चोर था ..
आश्ना हम भी थे, आशिकी उनको भी थी ,
अब जहाँ कुछ और है,पहले यहाँ कुछ और था ..
नाम होता था जुबान पर दूसरा वह दौर था,
एक ही आवाज थी ,हर शै में जो भर आई थी ,
आज जो घुट सा रहा है ,कल वही बेजोड़ था ..
.atr
वह दौर था .
Comments
5 responses to “वह दौर था .”
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मोहब्बत का वह दौर था ,
दिखता नहीं कुछ और था ….shaandaar!-

dhanyavad
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Good
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बहुत ही सुन्दर
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वाह वाह
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