वादियाँ मुस्कुराऐंगी…..|

——————————–

कहतें हैं-बदलाव प्रकृति का नियम है
तभी तो, बदलता रहता मौसम है
सिलसिला बदलाव का प्रखर हो चुका
बेहतर से बदत्तर और भी बदत्तर हो चुका

प्रेम नफ़रत बन गया—
दिखावटी भाव की मेहरबानी है
पहले औरों की परेशानी थी–
अब अपनों से खींचातानी है

मुश्किल पहचान बन गए
इंसान हैवान बन गए
नज़ारे बहारों के श्मशान हो गए
हर कोई एक-दूजे के मेहमान हो गए

चुम्बक भी शुन्य हो गया–
छुट कर गिर जाते बार-बार
वाणी की मिठास फीके पड़ रहे
आडम्बर में डुबा है व्यवहार

हर कुछ के बदलाव में-
सबकुछ ही बदल गया
अगर है नियम बदलाव प्रकृति का
तो विश्वास भी है पुनः आवृति का
कि,लौटेंगी वो सभी पलें-बदल गया जो
फिर बहार आएंगी–वादियाँ मुस्कुराऐगी..||

——- रंजित तिवारी “मुन्ना”

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

वाणी

मानव का गहना है वाणी, वाणी का भोगी है प्राणी । मधुर वचन है मीठी खीर, कटु वचन है चुभता तीर । सद वचन है…

Responses

New Report

Close