सावन ज़रूरी है

सुखों का रास जो रच ले वही मधुवन ज़रूरी है !
लबों की प्यास जो रख ले वही सावन ज़रूरी है !!

बहुत हम बंट के रह आए हमें ये सोचना होगा !
जहॉ सब मिलके अब बैठें वही आंगन ज़रूरी है !!

 

Related Articles

आज़ाद हिंद

सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत  ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन  !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो  !!   मे पृथ्वी…

Responses

New Report

Close