Arya Harish Koshal Puri's Posts

मुक्तक

अगर है शौक़ कविता का तो ये उलझन ज़रूरी है ! किसी के प्यार में क़ुरबान हो जीवन ज़रूरी है !! कई एक रोज़ से मॉ ने मेरा माथा नही चूमा ! मेरे माथे को मेरी मॉ का एक चुम्बन ज़रूरी है !! »

सावन ज़रूरी है

सुखों का रास जो रच ले वही मधुवन ज़रूरी है ! लबों की प्यास जो रख ले वही सावन ज़रूरी है !! बहुत हम बंट के रह आए हमें ये सोचना होगा ! जहॉ सब मिलके अब बैठें वही आंगन ज़रूरी है !!   »

प्रीति जलती है आग की तरह

प्रीति जलती है आग की तरह ! और बजती है राग की तरह !! प्रेम की फ़स्ल आज के इंसा ! काट देते हैं साग की तरह !! »

सामूहिकता से मिटे दुनिया के हर शूल

सामूहिकता से मिटे दुनिया के हर शूल ! निजता में सब बांटके करते भारी भूल!! »

ज्योति

हजारो लोग तम लेकर, निगलने दौड़ पड़ते हैं ! अगर एक ज्योति हल्की सी, कहीं दिखलाई पड़ती है »

सुकूं का बदन आज खस्ता बहुत है

सुकूं का बदन आज खस्ता बहुत है ! लुटेरों का दुनिया में दस्ता बहुत है !! है सब कुछ यहॉ पर अभावों का ताना ! मिले कुछ नही पर व्यवस्था बहुत है !! »

पैसा ही ईमान

पाप पुण्य कुछ भी नही, ऐसा हुआ जहान! पैसा ही भगवान है पैसा ही ईमान !! »

आजकल देवता और दनुज कुछ नही

आजकल देवता और दनुज कुछ नही ! ज्येष्ठ भ्राता सखा या अनुज कुछ नही !! एक दूजे को सब लूटने पर लग गए ! अब किसी से रहा कोई जुज कुछ नही !! »

गांव गांव में नगर नगर में बीमारी

गांव गांव में नगर नगर में बीमारी ! यज्ञ हवन में धूप अगर में बीमारी !! निजपूँजी के हवस ने ऐसा कर डाला! वही लुटेरी डगर डगर में बीमारी !! »

जिसको प्यार सिखाया मैने

जिसको प्यार सिखाया मैने ! राह सही दिखलाया मैने !! आज वही है जान का दुश्मन ! अपना जिसे बनाया मैने !! »

कोई अपना बनाना चाहता है

कोई अपना बनाना चाहता है! मुझे दिल से लगाना चाहता !! जीस्त को देके गहरा प्यार यारो! मुद्दतो फिर भुलाना चाहता है!! »

मन तुम्हारा गीत सा

मन तुम्हारा गीत सा , पावन सुरीला ! तन मधुर मकरंद से, आवेष्टित ! भाव का भ्रम जाल है, चारो तरफ! कामनाओं से भरी, मनुहार हो तुम! स्वप्न का संसार हो तुम !! आर्य हरीश कोशलपुरी »

सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं

सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं ! उजियारे को घोर अंधेरा कब तक लिक्खूं !! चारो तरफ है घोर निराशा फिर भी आशा लिख देता हूं ! सारे सुखों पे दुःख का डेरा कब तक लिक्खूं !! »

जब तक रहेगा हिंदू मुसलमान जहॉ में

जब तक रहेगा हिंदू मुसलमान जहॉ में ! रोयेगा फूट फूट के इंसान जहॉ में!! आओ गिरा दें मजहबी दीवार जहॉ से ! हो जाय ज़रा सत्य का सम्मान जहॉ में !! »

कुछ लोग कह रहे हैं ज़माना बदल गया

कुछ लोग कह रहे हैं ज़माना बदल गया ! नज़रें बदल गई हैं निशाना बदल गया !! मुद्दत की अपनी लाश है पहचानिए ज़रा ! केवल कफ़न नया है पुराना बदल गया !! आर्य हरीश कोशलपुरी »

वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले !

वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले ! किंतु न अपने हाल हैं बदले !! नये साल का शोर करो मत ! पेड़ों ने बस छाल हैं बदले !! थोड़ा चतुर हुई क्या मछली ! मछुवारों ने जाल हैं बदले !! वही आरती वाले कर हैं ! बस स्वागत के थाल हैं बदले !! एक गोल के चट्टे बट्टे ! थोड़ा सा पगताल हैं बदले !! धन धरती सामूहिक कर लो! दद्दा देखो काल हैं बदले !! आर्य हरीश जिलासचिव -प्रलेस अ० न० »