हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का

हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का
एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का
बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते
यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का
जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बिताओ
रोने का समय कहां, सिर्फ मुस्कुराओ
चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा
याद रहे, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा

Comments

5 responses to “हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का”

Leave a Reply

New Report

Close