हर्ष

ऐ हिमालय ऐ धरा , यूहीं मुस्कुराते रहें
न हो क्रंदन स्वर, सभी उर हर्षाते रहें
बस छह इतनी , देशहित शहीद होते रहें


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1 Comment

  1. Akanksha - July 31, 2018, 11:43 pm

    Kya baat h

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