हिंसा की गोली

मैं कैसे उड़ा गुलाल
जब भी हिंसा का
धुआं उड़ रहा है
मैं कैसे जलाऊं होली
जब मेरा देश चल रहा है
मैं कैसे खेलू रंग की होली
जब हर जगह तो रक्त पड़ा है
जब यमराज यमलोक छोड़कर
दिल्ली की सड़कों पे खड़ा है
मैं कैसे जाऊं मंगल गीत
जब मातम का रुदन बजा है
मानवता तो त्याग दी तुमने
अब बोलो कीमती धन क्या बचा है
मेहमान बैठा था
घर में तुम्हारी तुम्हारे
उसका लिहाज आया ना
अपनी समूह से हिंसा
करके भारत का है मान बढ़ाया ना

Comments

10 responses to “हिंसा की गोली”

  1. Priya Choudhary

    बहुत-बहुत धन्यवाद आपका🙏🙏

    1. धन्यवाद🙏🙏🙏

    1. जी धन्यवाद आपका

  2. Priya Choudhary

    Thankyou

Leave a Reply

New Report

Close