पूर्णिमा जब चांदनी धरती पर आकर पसारती है लगे चांदी के आभूषण से धरती का रूप सवारती है मां के पास आंगन में सोए नन्हे शिशु पर छांव करें उसे हरी समझ कर पूज गईं […]

यूं ही नहीं चीर रहे हवाओं को जहाज हिंद के पाक की नापाक आंखों की तकरार जांचने बैठे हैं हम चीन की छोटी आंखों की गुस्ताखियां देखना चाहते हैं तभी आज घड़ी के कांटे की […]

जहां हवाएं पल-पल बनाएं एक नई तस्वीर उसी आकाश में लिखना चाहूं मैं अपनी तकदीर नन्ही बूंदे नई किरण संग बना रही रंगोली मैं भी सुख के मोती ले लूं फैलाकर अपनी झोली अपने हृदय […]

काली जुल्फे सवारे काला लाए अंधियारे मिले कितहु ना चेन बढ़ रही बिरहा रे काहे रूप को सवारू नैन काजल क्यों बारू रंग तेरा भी तो काला तो क्यों अपना निखारू नैन कोमल है मेरे […]

जिसकी कामयाबी का चर्चा चारों ओर हो गया वह जाने क्यों अब खामोश हो गया जाने कैसा सितम ढाया होगा इस जिंदगी ने उस पर जो महफिलों का सितारा था वह सितारों में खो गया

क्षणभर में क्षीण हो छलकी आंख भारत मां की जब मजदूरों के छाले सीने में लेकर बैठ गई निज संतान का दर्द दिखा तो ऐसी दर्द की आह,,,,, भरे जैसे लोह पथ गामिनी सीने के […]

मैं आज जो निकली राहों पर यह राह मुझे बात सुनाती है कहे शर्म तो आती ना होगी मेरा घ्रणा से नाम बुलाती है कहे घूम रही चौराहों पे कोई वजह है या आवारा है […]

हमारा आशियाना एक वादी बन गया है फिलहाल अब घर के सामान हमारे मित्र हो गए एक सुंदर वादियों सी गूंज रही आवाज थी पुन्ह हमसे जो टकराई तो हम चित हो गए हमसे किसी […]

वाह भाई मजहब के ठेकेदारों क्या खूबी फर्ज निभाया है दुश्मन लगी है मानव जाति और काल को मित्र बनाया है कभी उनकी फिक्र भी कर लेता जिसे तेरी फिक्र सताती है कहीं कोई खड़ा […]

कर ले अखंड प्रतिज्ञा तू कर खंड खंड उस दहशत को जिससे यह विश्व है कांप रहा हौसलो से कर तू परस्त उसको तू दूर भ्रम का भूत भगा दहशत की नहीं जरूरत है असंयम […]

यह प्रकृति तू रोष दिखाती है पर क्या करेगी उस ममता का जो तुझसे खुद लड़ जाती है तूने सोचा दुख दूं उन सबको जो दिन-प्रतिदिन तेरा नाश करें पर हे ममता की मूरत तू […]

भारतवासी गर्व है तुझ पर तेरी एकता सच्चे मजहब पर प्रेम अखंडता की परिभाषा है तू स्नेह से दुलारी हुई भाषा है तू दंगों से हुआ था ना दिल तेरा कच्चा तू भारत का पूत […]

मैंने पूछ ही लिया था एक दिन गुडहल से इतनी हिम्मत तू कहां से लाता है मैं मुरझा जाती हूं थोड़े से दर्द से तू टहनी से टूट कर भी खिल जाता है खूबसूरती से […]

कोई क्या होड़ करेगा भारतीय नारी की क्या खूब ही संवारती हैं वो अपने सिंगार को वहीं वीरता के चर्चे भी कम नहीं उनके उंगली पर जाँचती हैं तलवार की धार को

एक बात तो सोचने वाली है जरा तुम भी गौर फरमाओगे किसी घायल की जो मदद करो तो वीडियो कैसे बनाओगे तुमसे ना होगा जाने दो तुम वीडियो बनाते ही रहना कोई मरता है तो […]

समय नहीं देते अभिभावक फिर बाद में पछताते हैं जब छोटे-छोटे बच्चों को बड़े फोन दिलाए जाते हैं पहले बच्चे खेलने जाते जाने संयम की रस्मों को अब तो मुखोटे बन कर बैठे देखो बड़े-बड़े […]

जब देश की विकास दर बढ़ती है तो जाल फैलाया जाता है सोशल मीडिया के पिंजरे में नई पीढ़ी को फसाया जाता है कुछ बाज सयाने उड़ जाते हैं जो जान गए रणनीति को नीति […]

जब हवा दर्द भरा किस्सा सुनाती है मेरी रूह भी सहम सी जाती है कहे मैं गई एक दिन कदम की डारी अंडों के पास मरी चिड़िया बेचारी कहे सब जग हवा हवाई विषैली जब […]

लोग कहते हैं मुझे भी ला देना वह मुस्कुराहट का मुखौटा जिसके पीछे यह दर्द भरा चेहरा छुपाती है मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है

सुलग रही है प्रतिदिन ज्वाला मानवता के पराली में कायरता की राख छनेगी कलयुग की इस जाली में पसरा होगा बस सन्नाटा मर्यादा की दहलीजो में बिक जाएगी प्रेम अखंडता नीलामी की चीजों में बना […]