Priya Choudhary, Author at Saavan's Posts

मोक्ष की माया

तेरी मोक्ष की माया को समझें हम इतने सक्षम नहीं भगवान जब मानव थे तो हमने हरि जब मोक्ष मिला तो हरी में हम »

एक भूल

मैं आज जो निकली राहों पर यह राह मुझे बात सुनाती है कहे शर्म तो आती ना होगी मेरा घ्रणा से नाम बुलाती है कहे घूम रही चौराहों पे कोई वजह है या आवारा है पत्थर मुझे पत्थर कहते हैं धित्कारे चौक चौराहा है सूरज की किरण से शरीर जला सन्नाटा पसरा चारों ओर करें भयभीत भयावर नैनों से एक पवन का झोंका करे था रोश यहां आई तो मुझको पता चला प्रकृति खुद बनी पेहरी थी सिर अपना झुका घर लौट गई क्योंकि गलती तो मेरी थी फिर ... »

दिल फरेबी का आलम

दिल फरेबी का आलम कुछ इस कदर छाया, दिल देकर भी दिलदार गद्दार नजर आया। »

गूंज

हमारा आशियाना एक वादी बन गया है फिलहाल अब घर के सामान हमारे मित्र हो गए एक सुंदर वादियों सी गूंज रही आवाज थी पुन्ह हमसे जो टकराई तो हम चित हो गए हमसे किसी ने पूछा तुम्हें जमीन क्यों भाई है क्या कहें इन दीवारों ने तारीयां दिखलाई है शर्म से गिरने की बात को छुपा गए खोई जेब की आमदनी का बहाना लगा गए जिसको टालना चाहा जनाब वह भी बहुत चतुर थे हमारे मायूस मुंह को वो देखें टुकुर-टुकुर थे उन्हें पता है सब वो... »

मजहब का पहरी

वाह भाई मजहब के ठेकेदारों क्या खूबी फर्ज निभाया है दुश्मन लगी है मानव जाति और काल को मित्र बनाया है कभी उनकी फिक्र भी कर लेता जिसे तेरी फिक्र सताती है कहीं कोई खड़ा चौराहों पर कहीं जान किसी की जाती है ऐसे ना बच पाएगा तू कोरोना कि इस बाढ़ में कब तक पाखंड रच आएगा तू यू मजहब की आड़ में इस पूरे देश की कोशिश को कुछ पल में यूं ना काम किया सच बोल यह तेरी गलती थी या गद्दारी का काम किया तूने भारत को दर्द द... »

एक अखंड प्रतिज्ञा

कर ले अखंड प्रतिज्ञा तू कर खंड खंड उस दहशत को जिससे यह विश्व है कांप रहा हौसलो से कर तू परस्त उसको तू दूर भ्रम का भूत भगा दहशत की नहीं जरूरत है असंयम का तू चित्र ना गङ भारत संयम की मूरत है छिन्न-भिन्न से विचार हुए क्यों काल खुद अपना बुलाता है जो रक्षा को तेरी खड़े हुए क्यों उन्हीं को आंख दिखाता है तू गौर फरमा उस मंजर पर एक जिंदा देश वह मर गया वह विजय रेखा है दूर बहुत तू अभी हौसला हार गया रणनीति धर... »

ममतामई प्रकृति

यह प्रकृति तू रोष दिखाती है पर क्या करेगी उस ममता का जो तुझसे खुद लड़ जाती है तूने सोचा दुख दूं उन सबको जो दिन-प्रतिदिन तेरा नाश करें पर हे ममता की मूरत तू तो खुद से हारी जाती है तूने सोचा कोरोना फैला करके इस मानव जाति का नाश करूं जब सारा प्रदूषण बंद हुआ अब तू ही सुगंध फैलाती है तू देख भले नादान हूं मैं भले नीति से अनजान हूं मैं मां बुरा नहीं कर सकती है इस बात का भी प्रमाण हूं मैं तो है प्रकृति तू... »

सुख अनुभव

रोज-रोज के झंझट में पिस्ता था तो क्या खुश था तू दो घड़ी अपनों का साथ मिला अब कर अनुभव सुख किसने है यह रोज कि भागा दौड़ी में या कुछ पल की उस जोड़ी में उस जग की द्वेष चिंगारी में या बच्चों की किलकारी में जीवन जीता तू लाचारी में अब सोच तेरा मन किसमें है जब झंझट तेरे पल्ले थी तब अपनों से चिढ़ जाता था कभी कोप करता था माता पर कभी पिता को आंख दिखाता था तू बैठ प्रेम की छाया में फिर से सुख प्रेम का अनुभव क... »

परीक्षा की घड़ी

मेहनत में जुटे हैं जी जान से हम तो परीक्षा की घड़ी में कहीं और मन ना भटके तर्जनी के छूने से ढहने का डर है तप की तपन बिना है कच्चे मटके »

सब्र की मंडेर

मेहनत का बीज बोकर सब्र की मुंडेर पर खड़े हैं डरते हैं कोई अंधेरी ना आए »

किस्मत की किताब

कहां रखी है वह किताब जिसमें लिखा है नसीब मेरा मुझे दुख मिटा कर थोड़ी सी खुशी लिखनी है उसमें »

कायनात का साथ

बड़ी देर लगा दी कायनात तूने साथ निभाने में अब उम्मीद ही बची है उनके पास आने में »

खुशी की वापसी

मेरी यह किस्मत मुझे कैसा खेल दिखाती है दहलीज से खुशी हाल पूछ लौट जाती है »

हुकुम हजूर का

एक हुकुम आया मेरे हजूर का घुंघट में छुपा लो अपना चेहरा यह नूर का लगे ना नजर किसी का काफिर की तुमको हिफाजत ना होगी मैं राही हूं दूर का »

कायरों का कायदा

नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं होती कायदा कायरों की फितरत नहीं होती जो काफिर आंख दिखाने से मान जाते तो गोली उठाने की जरूरत क्या होती है »

दुनिया से रुखसत

दुनिया से रुखसत होगी मेरी रूह तो हम भी रोएंगे तुम से बिछड़ कर खुदा का भी दिल पिघल जाएगा हमें मिला देगा हमारी तड़प देखकर »

लुका छुपी

लुका छुपी का खेल अब खेला नहीं जाता पछतायेगा जाने के बाद तुम्हें मेरे तेरा सब कुछ जीने का मेरा धेला भी नहीं जाता »

सुंदरबन की मोरनी

सुंदरबन की मोरनी को बादलों की तलाश है आने पर नाचती है बांधकर वह घुंघरू ये जानकर भी बादल दूर है उससे वह खुश है कि बादल है रूबरू »

मोहर्रम की नजर

मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते हुकुमत करते हम दुनिया में सारी मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती »

मेरी लेखनी

मेरी लेखनी कुछ ऐसा कमाल कर दिखा दे इन तीनों दुनिया को एक साथ ला दे करूंगी मैं उम्र भर तेरी जी हजूरी जो मेरे लिखे शब्द को हजूर तक पहुंचा दे »

इंसानियत

तकदीर बनाने वाले ने क्या खूब ही खेल रचाया है इंसान बनाया दुनिया में इंसानियत को कहीं छुपाया है »

यमराज से बेईमानी

ऐ मौत तू इतनी बेरहमी न दिखाया कर यमराज अगर भेजें किसी सैनिक को बुलावा तू यमराज से थोड़ी सी बेईमानी कर जाया कर »

मानवता का मजहब

भारतवासी गर्व है तुझ पर तेरी एकता सच्चे मजहब पर प्रेम अखंडता की परिभाषा है तू स्नेह से दुलारी हुई भाषा है तू दंगों से हुआ था ना दिल तेरा कच्चा तू भारत का पूत है सच्चा जब दंगों से जले आशियाने तुम गए मदद का हाथ बढ़ाने मंदिर को बचाने आए मौलाना तो पंडित खड़े थे मस्जिद बचाने भगवान खुदा ईश्वर कोई कह देता उनको रब है सभी धर्मों से बड़ा एक मानवता का मजहब है »

गुड़हल

मैंने पूछ ही लिया था एक दिन गुडहल से इतनी हिम्मत तू कहां से लाता है मैं मुरझा जाती हूं थोड़े से दर्द से तू टहनी से टूट कर भी खिल जाता है खूबसूरती से जवाब दिया गुड़हल के फूल ने मेरी खूबसूरती का असर हुआ होगा इसीलिए खिल जाता हूं मैं कि मेरी मुरझाने का असर उस पर होगा »

जीवन का दर्द

जीवन की राह में सहता है वो दर्द तेरे संग मैं झेलू जो कहे कि साथ निभाएगा तू तो तेरी बला मैं अपनी सिर लेलू »

भारतीय सिंगार

कोई क्या होड़ करेगा भारतीय नारी की क्या खूब ही संवारती हैं वो अपने सिंगार को वहीं वीरता के चर्चे भी कम नहीं उनके उंगली पर जाँचती हैं तलवार की धार को »

रूह वाला इश्क

इश्क वो नहीं जिसमें भावनाओं का मजाक बनाया जाता है इश्क तो वह है जो रूहानियत से निभाया जाता है »

आशियाना

माना बहुत दूर है आशिया तुम्हारा इतने दिन हो गए तुम्हें आते आते इंतजार की घड़ी इतनी बड़ी हो गई मेरी कलम थक गई तुम्हारी यादों को बताते »

सदाबहारी का दावा

क्योंकि तकलीफ तो हमें भी होती है तो दवा नहीं करते सदाबहारी का मोहब्बत कर हिस्से में आई बदनामी एक जख्म दे दिया है तुमने यारी का »

दिल कुरेदना

सौ दफा दफन किया मैंने तेरी याद को कब्र की धूल को उड़ा के दिल कुरेदती है कैसे »

सोचने वाली बात

एक बात तो सोचने वाली है जरा तुम भी गौर फरमाओगे किसी घायल की जो मदद करो तो वीडियो कैसे बनाओगे तुमसे ना होगा जाने दो तुम वीडियो बनाते ही रहना कोई मरता है तो मरने दो तुम्हें कौन सा होगा दर्द सहना अरे कायरों कुछ तो शर्म करो कब तक तुम देश लजाओगे हृदय विराट है देश मेरा तुम इसका शीश झुकाओगे होगे तुम्हारी इन्ही हरकतों से इंसानियत शर्मसार है तुम सेकी समझते इन सब की बुद्धिहीनता की यह मिसाल है रेलों पर स्टंट... »

फोन में प्राण

समय नहीं देते अभिभावक फिर बाद में पछताते हैं जब छोटे-छोटे बच्चों को बड़े फोन दिलाए जाते हैं पहले बच्चे खेलने जाते जाने संयम की रस्मों को अब तो मुखोटे बन कर बैठे देखो बड़े-बड़े चश्मो को फोन के सामने भोजन फीका ना जाने कैसा स्वाद है ऐसा लगे जब फोन छिने तो पूरी जिंदगी खराब है पहले लोग कम कहने पहनते थे कहीं हो ना जाए छीना झपटी चोरों में मर्यादा रही ना फोन ही झपटने है कपटी »

सोशल मीडिया के फंदे

जब देश की विकास दर बढ़ती है तो जाल फैलाया जाता है सोशल मीडिया के पिंजरे में नई पीढ़ी को फसाया जाता है कुछ बाज सयाने उड़ जाते हैं जो जान गए रणनीति को नीति को वह चाल विदेशी समझ गए उन होने वाली अनीति को पर कुछ पंछी जो न्याने थे रणनीति से अनजाने थे वह फंसे हुए हैं पिंजरे में अनुभवी की बात ना माने थे वहां तो कुछ नहीं मिलता है बस भ्रम फैलाने का धंधा है घर बार बुला दिए जाते हैं ये खेल बड़ा ही गंदा है »

हवाओं के किस्से

जब हवा दर्द भरा किस्सा सुनाती है मेरी रूह भी सहम सी जाती है कहे मैं गई एक दिन कदम की डारी अंडों के पास मरी चिड़िया बेचारी कहे सब जग हवा हवाई विषैली जब खुद जग उड़ाए है कण सारी मैली यह लड़ती हवा मुझसे क्यों ना तू बोले दिल कैसा कठोर है जो कभी भी ना डोले मैं बोलूंगी क्या बस तू इतना बता दे जो करूं कहीं शिकायत तो रिश्वत वह खाते एक दूंगी उपाय जो तू उसको माने उद्योगपति घर यह धुआं उड़ा दे जरा उन्हें समझा क... »

मुस्कुराहट का मुखौटा

लोग कहते हैं मुझे भी ला देना वह मुस्कुराहट का मुखौटा जिसके पीछे यह दर्द भरा चेहरा छुपाती है मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है »

मानवता दहन

सुलग रही है प्रतिदिन ज्वाला मानवता के पराली में कायरता की राख छनेगी कलयुग की इस जाली में पसरा होगा बस सन्नाटा मर्यादा की दहलीजो में बिक जाएगी प्रेम अखंडता नीलामी की चीजों में बना हुआ था हर कोई कृतहन तपोवन की इस भूमि पे उड़ेली हुई है विश की प्याली कर्म पथिक की धुली पे कोई ना करता लाज शर्म संबंधों को रखें ठोकर पे जिनके पास थी विराट संपत्ति संतान रखें उन्हें नौकर से »

तबाही

वह कहते हैं तबाह हो गए हम तेरे इश्क में कैसे कहे तबाही तो हमारी मोहब्बत की हुई है »

दिल जलाने वाले

उन्हें पाने की कोशिश में हम खुद को बुलाते गए हम दिल लगाते गए वो दिल जलाते गए »

फ्रिज की राह

सिर न झुकाना अपना फर्ज की राह में क्योंकि सर तो झुकेगा सिर्फ खुदा की पनाह में »

हिमालय की हंसिनी

हिमराज के सौंदर्य रीझे तपस्विनी सी बैठी थी नजर को अपने बनाई थी सारंग शीलीमुख नजरे ऐठे थी स्वेत वस्त्र वो करे थी धारण वनमाला गल पहने थी राजमुकुट सी धरे थी सीस पे लालू पुष्प की टहनी थी सजा लिए थे ओस के मोती अपनी श्वेत पोशाक पे हंसिनी की हो होड़ नहीं चाहे गहने पहनो लाख के शांत सरोवर ने पहना दी भवर की एक करधनी थी सरोवर दर्पण देखके रीझे हिमालय की हंसिनी थी »

खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली

खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली नैनों से नींदो की कर ली है चोरी तुझसे मिलने पहले मैं थी चित् कोरी अब चित मेरा तुझ में ना मिले कोई ठोरी तू आकर मिले ना क्यों मुझसे कठोरी खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली पहले तुम ने बांधी थी प्रेम की यह डोरी अब रह ना सके तुम बिन यह ब्रज की छोरी सुधे मार्ग जाती थी मैं तो बुलाते थे तुम ही कहे राधा भोली खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली कहती है सखीयाँ मोय मोहन दिखोरी तू तू कर... »

महलों की शहजादी

हंसों के झुंड में बगुलु की आबादी बूंदों ने की है बादलों से शादी बैठे हैं बनकर हम कब से मुरादी एक बार दीदार दे दे वो महलों की शहजादी »

हिंसा की गोली

मैं कैसे उड़ा गुलाल जब भी हिंसा का धुआं उड़ रहा है मैं कैसे जलाऊं होली जब मेरा देश चल रहा है मैं कैसे खेलू रंग की होली जब हर जगह तो रक्त पड़ा है जब यमराज यमलोक छोड़कर दिल्ली की सड़कों पे खड़ा है मैं कैसे जाऊं मंगल गीत जब मातम का रुदन बजा है मानवता तो त्याग दी तुमने अब बोलो कीमती धन क्या बचा है मेहमान बैठा था घर में तुम्हारी तुम्हारे उसका लिहाज आया ना अपनी समूह से हिंसा करके भारत का है मान बढ़ाया न... »

मोहब्बत का आशियाना

दिल जलाया है हमने एक शमा बनाकर उजाला जो करना था तेरे मोहब्बत के आशियाने में »

मोहोब्बत

हर किसी से मोहब्बत की यू ही हांमियां भरना ठीक नहीं दिल लगाकर दिल तोड़ने की गुस्ताखियां करना ठीक नहीं मेरी मोहब्बत का तो खुद हाफिज गवाह है मेरी पाक मोहब्बत की यू बदनामियां करना ठीक नहीं »

मैहरम

मैं कैसे मोहब्बत को दूं झुकने जब मेरा मेहरम मुझ में मैं उसमें »

सरहद वापसी

कल्पना का कला की छाया नहीं थी सत्य पांव पसार रहा था रण भूमि की दहलीज पर जाकर दुश्मन को ललकार रहा था दुश्मन की आंखों में देखें कितनी होशियारी है पीठ पर बिस्तर बांध लिया जंग जाने की तैयारी है लिपट जाता था पिता से बेटा कभी मां का पल्लू भिगोता था मां बाबा फिर क्यों जाते हैं कह कह कर वह रोता था व्याकुल होती है भ्याता बिरहा की पीर सताती है रण मे प्रिय ना विचलित हो वो असू घूप पी जाती है दोनों हाथों को रख... »

कोयल

नगर कुमारी देख कर बोली करूप है कोयल काली मेरे उपवन आकर लजाए बैठी कदंब की डाली मैं सुर के सिंगार से सजती भले रंग मेरा काला अभूषण के सिंगार सजे तू पहन वैजयंती माला तारे पृथ्वी यह सारा ब्रह्मांड है काले रंग में चांद से मुख पर रीझ रही तू घूमे है कितने घमंड में नगरधीश है पिता तो रीझे खोल के चलती केष ऐसे नगर मेरे पांव तले हैं रोज मूलांघू प्रदेश तू महलों की कोठरी में बंद मेरा भवन प्रकृति नील सरोवर बनाके ... »

सतयुग वापसी

जब शब्दों के बाण चलाने में मर्यादा ना लागी जाए जब सभी मन में प्राण यह ले ले किसी और का हक ना खाएं जात-पात और ऊंच-नीच के जब सभी भेद मिटा दिए जाए तब शायद सतयुग वापस आए पन्नी में बंद करके बेटियां जब कचरे में ना फेकी जाए मेहनत बराबर करने पर भी बेटो से कभी कम ना खाए दरिंदों का कभी साया पड़े ना बेखौफ हो बेटी पढ़ने जाए तब शायद सतयुग वापस आए जब भाई भाई के भाव को समझे कोट कचहरी न समझाने आए संपत्ति की तराजू... »

मोहब्बत की हद

तुझसे मोहब्बत से पहले क्या पता था मुझे मेरे प्यार की अर्जी या एक साथ रद्द होगी रोज लेता है मेरी मोहब्बत का इंतिहान तेरे शक के कोई एक हद तो होगी »

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