बजे ढोलक बजे नगमे
मचे हुढ़दंग होली में
रंगी धरती रंगा
अम्बर ।
उड़े है रंग होली में
कोई गुब्बारे से खेले
तो कोई मरे पिचकारी
पड़ी हैं पान की छींटे
चढ़े है भंग
होली में ।
बजे ढोलक बजे नगमे
मचे हुढ़दंग होली में
रंगी धरती रंगा
अम्बर ।
उड़े है रंग होली में
कोई गुब्बारे से खेले
तो कोई मरे पिचकारी
पड़ी हैं पान की छींटे
चढ़े है भंग
होली में ।