अंतर्मन

खामोश दिखने वाले अक्सर बहुत बोला करते हैं,
अपने ही अंतर्मन को वो हर दम टटोला करते हैं,

जिज्ञासा छिपती है पर चेहरे पर दिख जाती है,
कभी कभी जब मुख से वो चुप्पी तोला करते हैं,

सुनता नहीं कोई एक हद बांधी है सबने आगे,
पर कहते हैं कुछ राही से बेहतर बोला करते हैं॥

राही अंजाना

Comments

3 responses to “अंतर्मन”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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