बीच सड़क पर जलते देखो
शोले और अंगारे,
बूढ़े बच्चे और जवान
इस अशांति से हारे।
प्रेम से रहने का पाठ पढ़ाती
है हमारी संस्कृति,
अंतरराष्ट्रीय शांति पर कितनी
लिखी जा चुकी हैं कृति।
पर निस-दिन इस विश्व में देखो
होता रहता है युद्ध,
इतनी अशांति देखकर जग में
प्रज्ञा’ का मन है क्षुब्ध।
इजरायल और हमास को
जाने क्या है सूझा !
ऐसी महामारी के चलते भी
आपस में लड़-जूझा।
बंद करो यह लड़ना-भिड़ना
आपस में सौहार्द बढ़ाओ,
प्रेम से मिलकर रहो और
मित्रता का हाथ बढ़ाओ।।
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