अतीत की छाया

अतीत की छाया पड़ने न देना,
यादों का साया दुख देता है ।
खूश रख अपने को फिलहाल से,
उम्मीद का सवेरा सुकून देता है,
लगा अनुमान मस्तिष्क से तू,
कौन बुरा, कौन अच्छा है!
ढूंढ इस पल में ही खुशियां,
मुस्कराने में क्या जाता है!

Comments

12 responses to “अतीत की छाया”

  1. Aditya Kumar

    कर्म की महत्ता को स्वीकार करना अति आवश्यक है। मनुष्य को अपने आज में जीना समझना होगा

    1. हार्दिक धन्यवाद

  2. Priyanka Kohli

    Kya baat h!❤😊

  3. Deep Patel

    Very nice

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद सर

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    जो दुख देने वाली बातें हैं उन्हें हमें कभी याद नहीं करना चाहिए हमें अपने वर्तमान में खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए
    बहुत ही सुंदर भाव अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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