दो अनजानों का ये रिश्ता,
प्रभु आशीष से जुड़ता है
सात वचनों और सात फेरों का,
रिश्ता प्रेम से बंधता है।
गाँठ रिश्ते की गठबंधन के साथ,
विश्वास के साथ जुड़ जाती है
कभी नोक – झोंक जो होती
रिश्ता और गहरा करती है।
रिश्ते की कच्ची इस माला को
पक्की जब दोनों करते हैं
विश्वास, प्रेम, सम्मान भाव से
एक दूजे के संग मिलती है।
एक हार को मान भी ले तो
दूजा हौसला बन जाता है
जीवन की कठिन राह भी
मिलकर सरल फिर बनती है।
साथ एक दूजे का हरदम
रिश्ते की बगिया महकाता है
हाथ थाम जीवन की नैया
पार भी मिलकर कर जाता है।।
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