•••
किये जिस पे भी तुमने तंज़
वो सब तुम्हारे हैं।
रंज जिस से भी करोगे
वो सब तुम्हारे हैं।।
रूबरू लौट कर आयेंगे
वो जानिब को तेरी।
अज़ल से बहते हुए दरिया
के सभी धारे हैं।।
•••
@deovrat 30.09.2019
अपनापन
Comments
12 responses to “अपनापन”
-

बहुत खूब
-

बहुत बहुत धन्यवाद देवेश जी
-
-

वाह
-

जी बहुत बहुत शुक्रिया
-
-

Nice
-

जी बहुत बहुत शुक्रिया
-
-

Good
-

जी बहुत बहुत शुक्रिया
-
-

Wah kya khub
-

जी बहुत बहुत शुक्रिया
-
-

वाह
-

जी बहुत बहुत शुक्रिया
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.