अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल गया

तालीम नहीं मिली कभी, ना इल्म था हमें कभी
बस इक तसव्वुर था, जो ज़हन मे घुल गया
कभी शिरकत किया करते थे, हम महफिल ए इश्क में
अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल गया…

Comments

4 responses to “अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल गया”

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब

  2. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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