तालीम नहीं मिली कभी, ना इल्म था हमें कभी
बस इक तसव्वुर था, जो ज़हन मे घुल गया
कभी शिरकत किया करते थे, हम महफिल ए इश्क में
अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल गया…
अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल गया
Comments
4 responses to “अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल गया”
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nice
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वाह
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बहुत खूब
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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