अभिमान

जो छूले मन कोई मेरा मुझे अभिमान हो जाये,
क्या होती है हृदय धड़कन मुझे भी ज्ञान हो जाये,

किसीकी बात सुनकर मैं भटक जाऊँ नमुमकिन है,
वो दे आवाज़ तो मैं ज़िंदा हूँ मुझे भी भान हो जाये,

आसमां से गिरा धरती पे जो वो टूटा एक सितारा हूँ,
वो देखे एक नज़र मुझको मुझे मेरी पहचान हो जाये।।

राही अंजाना

Comments

4 responses to “अभिमान”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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