किसी का आसरा नहीं करूँ
मन में दंभ न भरूँ
अभ्यर्थना है प्रभु
बस तेरे पनाह में मैं रहूँ
अभ्यर्थना है प्रभु
Comments
3 responses to “अभ्यर्थना है प्रभु”
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद ।
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ईश्वर के प्रति समर्पण भाव को प्रदर्शित करती सुन्दर पंक्तियाँ
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