अभ्यर्थना है प्रभु

किसी का आसरा नहीं करूँ
मन में दंभ न भरूँ
अभ्यर्थना है प्रभु
बस तेरे पनाह में मैं रहूँ

Comments

3 responses to “अभ्यर्थना है प्रभु”

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद ।

  1. ईश्वर के प्रति समर्पण भाव को प्रदर्शित करती सुन्दर पंक्तियाँ

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