अवकाश पर जाएगी ईष्या…

ऐ रात ! सो जा जरा
कल होगा नया सवेरा
जिसमें उगेगा परिश्रम का सूरज
धूमेगा धरा को निज
अवकाश पर जायेगी ईष्या
मिट जाएगी तेरी हर शंका…

Comments

2 responses to “अवकाश पर जाएगी ईष्या…”

  1. vikash kumar

    Motivated poem

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