*अशोक वाटिका और रामभक्त हनुमान*

अशोक वाटिका में कितना शोक !
माता सीता का दुःख देख
हनुमान सके ना खुद को रोंक
माता सीता के अग्नि मांगने पर
डाली मुद्रिका हनुमान ने
राम की महिमा से अशोक वाटिका
में गुञ्जन किया हनुमान ने
दूत बताकर राम का सीता को मातु बताया
मैं राम भक्त हूँ माते यह कहकर
अपना वृहद रूप दिखाया
माता सीता की आज्ञा पाकर
भूख मिटाई हनुमान ने
अशोक वाटिका तहस-नहस कर
रावण का अहंकार मिटाया हनुमान ने
विभीषण का गृह छोंड़ा परंतु सारी लंका जलाई
कुछ इस तरह से हनुमान ने रामभक्ति दिखलाई..

Comments

8 responses to “*अशोक वाटिका और रामभक्त हनुमान*”

  1. बहुत सुंदर भाव

  2. सुन्दर काण्ड का अति सुन्दर वर्णन किया है प्रज्ञा जी ने ।

    1. धन्यवाद दी

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