आंसू

रहता है कहाँ है कहाँ घर तेरा,

नाम आंसु से परिचय हुआ क्यों तेरा,

ख़ुशी-ग़म का आँखों से रिश्ता तेरा,

हर इंसा से नाता जुड़ा क्यों तेरा,

समझ के रंग सा न किसी अंग सा,

यूँ रूप पानी के जैसा बना क्यों तेरा॥
राही (अंजाना)

Comments

One response to “आंसू”

  1. Abhishek kumar

    Nice

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