आखिर कौन

बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन।
सबके हार गीले हैं आंसूओं से
मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।।

Comments

4 responses to “आखिर कौन”

  1. हार के जगह हाथ पढ़ें

  2. बहुत ख़ूब भाई जी।

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