*आग्रह*

ये सर्दी का मौसम,
ये कोहरे का नज़ारा
आज है ये आग्रह हमारा
कोहरे में डूबी,
यह सुन्दर-सुन्दर सुबह
जी भर के जी लें,
आओ ना एक कप चाय,
क्यूं ना साथ-साथ पी लें..
_____✍️गीता

Comments

6 responses to “*आग्रह*”

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

  1. Rishi Kumar

    बहुत सुंदर भाव

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद ऋषि जी

  2. Satish Pandey

    कवि गीता जी की यह कविता ठंडे मौसम के रंग से सरोबार होकर परवान चढ़ी है। कविता में अति सुन्दर शिल्पगत सौंदर्य है।

    1. Geeta kumari

      इस सुन्दर समीक्षा और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।

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