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  1. कवि गीता जी की यह कविता ठंडे मौसम के रंग से सरोबार होकर परवान चढ़ी है। कविता में अति सुन्दर शिल्पगत सौंदर्य है।

    1. इस सुन्दर समीक्षा और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।

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