आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये
दिल के राज जो छुपे बैठे है अरसे से
उनसे कुछ गुफ़्तगू हो जाये
इससे पहले उम्र ए दराज धोखा दे
ले ले कुछ लफ्जों का सहारा
कहीं लाठी का सहारा ना हो जाये
आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये|
आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये|

Comments
7 responses to “आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये|”
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nice
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kya khoob kahi
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thanks
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thanks
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thank you
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वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां
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Awesome
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