आज कुछ परेशान-सी हूँ मैं
तेरी बेरुखी से हैरान-सी हूँ मैं
जमीं पर पैर भी नहीं रुकते
तितलियों के पंख भी रचते
खाली मैदान-सा है दिल मेरा
जहाँ परिंदे भी नहीं बसते
दिल के फैसलों में थोड़ी
नादान-सी हूँ मैं
जाने क्यूं
आज कुछ परेशान-सी हूँ मैं !!
आज कुछ परेशान-सी हूँ मैं
Comments
4 responses to “आज कुछ परेशान-सी हूँ मैं”
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अतिसुंदर
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धन्यवाद
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हृदय के भाव प्रकट करती हुई ख़ूबसूरत पंक्तियां
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धन्यवाद
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