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  1. खुशी की कोई परिभाषा नहीं है , कवि सतीश जी ने अपनी कविता के माध्यम से यही संदेश देने की कोशिश की है ।भोजन मिलने पर कोई बालक इतना प्रसन्न भी हों सकता है,जो कि एक मूलभूत आवश्यकता है। जीवन के दृष्टकोण को समझाती हुई बेहद शानदार प्रस्तुति ।

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