आज देखा फिर से उनको

आज देखा फिर से उनको
अजनबी से लग रहे थे,
बात तो कुछ की नहीं
लेकिन मजे में लग रहे थे।
वे तो हमसे दूरियां रख
दूसरों के हो लिए हैं,
हम निरी तन्हाइयों
खूब सारा रो लिए हैं।
जब भी उनको देखते हैं
याद आ जाते हैं पल
जिन पलों को आज हम
अपनी वफ़ा से खो दिए हैं।

Comments

18 responses to “आज देखा फिर से उनको”

  1. Prayag Dharmani

    प्रेम की गहराई है इसमें, सुंदर रचना

    1. धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद

  2. बहुत सुंदर रचना सतीश जी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    काव्य प्रतियोगिता में जीत के लिए बहुत बहुत बधाई

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  4. Praduman Amit

    सुंदर प्रस्तुति।

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

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