आदत से लाचार मेरा कान्हां

चुरा के माखन खाए नटवर नागर नंदा।
कान पकड़ के खींचीआज मैया यशोदा ।।
माखन चोर है, मैया यशोदा के नंद लाला।
तभी तो शिकायत कर गयी समस्त ब्रजबाला ।।
घर 🏡 घर में मटकी तोड़ना माखन खाना।
पकड़े जाने पर सुंदर सुंदर बहाना बनाना।।
परेशान हो कर जब पीटने दौड़ती यशोदा मैया।
फूट फूट कर रो पड़ते ब्रज के छोटे छोटे गैया।।
चुरा कर माखन ए मैया अब कभी न खाऊंगा।
अपनी माँ के मन को अब न ठेस पहुंचाऊंगा।।
यही सुन के लगा लेती गले अपने कान्हां को।
लाचार कान्हां चल पड़े फिर माखन चुराने को।।

गोविंदा

Comments

10 responses to “आदत से लाचार मेरा कान्हां”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Sunder

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद पंडित जी।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया मिस अंजली जी

  2. Geeta kumari

    सुंदर

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद। समीक्षा के लिए।

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद मोहन सर।

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद पांडे जी।

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