खुश रहना हंसना तुम सीखो।
दुखों से भी लड़ना तुम सीखो ।
तूफानों को झेलना सीखो।
चट्टानों सा बनकर देखो ।
आकाश में उड़ते पंछी देखो।
कैसे नदिया बहती देखो।
काम करें सब अपना सीखो।
राहों से मंजिल पाना सीखो
हक के लिए लड़ना तुम सीखो।
आगे बढ़ते जाना सीखो।
हंसना और हंसाना सीखो ।
काम किसी के आकर देखो।
मुस्कुराहट आंखों में देखो।
गिर गिर कर संभालना सीखो।
नहीं किसी पर हंसना सीखो।
फिर देखो रंगीन है कितनी।
जिंदगानी हसीन है कितनी।
बातूनी नमकीन है कितनी।
निमिषा सिंघल
आनंद नाद
Comments
11 responses to “आनंद नाद”
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सुन्दर
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धन्यवाद
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वाह बहुत सुंदर
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Thanks
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Wah
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Thanks
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Thanks
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Good
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Thanks dear
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Nice
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Dhanyavad aapko
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