आपकी नींद में हम
स्वप्न बन के आ न जाएँ
इसलिए दिल किवाड़ों को
हमेशा बंद रखना।
गर कभी हम राह में
मिल जाएँ तुमसे यूँ अचानक
तब समझना अजनबी हैं
याद को ही बंद रखना।
आपकी नींद में हम
Comments
8 responses to “आपकी नींद में हम”
-
Sundar
-
धन्यवाद
-
-

सुन्दर प्रस्तुति
-
धन्यवाद जी
-
-
बहुत खूब
-
सादर धन्यवाद जी
-
-

स्वप्न बन के आ न जाएँ
वाह वाह-
Thanks
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.