4 Comments

  1. आज मैं सोच रहा हूं कि आशिकी इतनी अजीब क्यों है ?
    जिससे मिलना असंभव लगता है वही दिल के करीब क्यों है !
    —– बहुत ही सुन्दर पंक्तियों की रचना की है आपने, बहुत खूब, भाषा की सरलता अद्भुत है।

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