हाथ पकड़ा दो कलम
मैं लिखती जाऊं
हर लफ्ज को
तेरे हर एहसास को,
मेरी हर एक पीर को
आवाज दूं गर तुम सुनो !
मैं गायिका बन जाऊंगी
तुम्हारी इक मुस्कान पर
मैं सौ दफा वारी जाऊंगी
है सृजनशक्ति
इतनी मुझमें
लिख सकती हूँ हर
एक चीख को
तेरी बुझती आस को
मेरी ढलती उम्र को…!!
आवाज दूं अगर तुम सुनो !
Comments
3 responses to “आवाज दूं अगर तुम सुनो !”
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अतिसुंदर भाव
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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