आशिकों की आशिकी

अब तो संभलो नाजुक लड़कियों
ये आशिक इतने नादान नहीं
पीकर रस ये उड़ जाते हैं
धरना इन पर ध्यान नहीं
ढूँढे लड़कियों को गलियों में
सब तो आज शिकारी हैं
आगे क्या अब लड़कों का मकसद
इसका भी अब ज्ञान नहीं
मत करो विश्वास लड़कों पर
ये झूठी प्रेमलीला रचाते हैं
लड़कियों को प्रेमजाल में फांसकर
लोटकर फिर ये आते नहीं
रोज नई गर्लफ्रेंड बनाना ही
नया बना फैशन इनका
ब्वायफ्रेंड के चक्कर में पड़ना
लड़कियों ये दुनिया की शान नहीं
जात धर्म का नाम बदलकर
धोखा लड़के देते हैं
नजरों में आशिकों की कोई
लड़कियों का अब मान नहीं
ऋषि मुनियों की धरती पर
वेद सरीखा ज्ञान नहीं
सॅस्कृत भाषा से बढ़कर कुछ
दुनिया में वरदान नहीं

प्रस्तुति – रीता अरोरा

Comments

2 responses to “आशिकों की आशिकी”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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