आश

बैठे है अकेले राह में, दिल में कोई आश है ,

घडी की बदलती सुइयो के _सही होने का इन्तजार है ,

कुछ कदम बढाने है ,और ये सुनसान राह पार है ,

फिर करवट हम भी बद्लेगे ,क्योकि ….

राह के पार खुशहाल संसार है ,

किसी के हाथो में हाथ है ,

तो कही भरा पूरा परिवार है !

   – सचिन सनसनवाल

Comments

4 responses to “आश”

  1. Abhishek kumar

    Good

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