आसान नहीं

समूची इंसानियत के हक-हकूक की बात
ऊंचे-ऊंचे ओहदे पर आसीन जनों की असली औकात
भुला पाना आसान नहीं।
बदतरी में बेहतरी‌ तलाशने की नाकाम‌ कोशिश
क़ातिल पंजों की पकड़ से निकलने की कोशिश
भुला पाना आसान नहीं।
आक्सीजन की जरूरत में भटकते अपने
दवाओ की कालाबाजारी में बिखरते सपने
भुला पाना आसान नहीं।
खाली अस्पताल के गेट पर लिखा जगह नहीं
जरूरत के समय इंसानों के दिल में रहमत नहीं
भुला पाना आसान नहीं।
जीते जी अपने लिए दो पल हासिल नहीं
मरते-मरते उन्हीं की अपनापन मयस्सर नहीं
भुला पाना आसान नहीं

Comments

6 responses to “आसान नहीं”

  1. Ekta

    वास्तविक चित्रण

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Bahut hi Sundar abhivyakti shabdon ki kalakari aap Mein Bekhudi Hai

  3. Amita

    ऑक्सीजन की जरूरतमें भटकते अपने दवाओं की कालाबाजारी में बिखरते सपने,
    बहुत सुंदर यथार्थ चित्रण

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