वृक्षों पर आ गया सूरज,
धरा पर छा गया सूरज।
बिखराकर अपनी स्वर्ण रश्मियाँ,
गीत कोई गा गया सूरज।
हल लेकर निकल पड़े किसान,
देखो आ गया सूरज।
अंधकार मिटाने धरा से,
सदियों से आता है सूरज।
नयी भोर के नित नये गीत,
हमें सुनाता है सूरज।
रौशनी बिखरती है धरा पर,
धरा को भा गया सूरज॥
_____✍गीता
आ गया सूरज

Comments
4 responses to “आ गया सूरज”
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Bahut sundar rachna
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Thank you Rohit ji
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वृक्षों पर आ गया सूरज,
धरा पर छा गया सूरज।
बिखराकर अपनी स्वर्ण रश्मियाँ,
गीत कोई गा गया सूरज।
—- वाह वाह, क्या बात है।-
उत्साह वर्धन करती हुई इस सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी
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