मैं इक सदी से बैठी हूं, इस मोड़ पर
मगर कोई इंसा इधर से गुजरा नहीं
इक सदी से
Comments
7 responses to “इक सदी से”
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छोड़ दो सदायें देना नादान भंवरों को,
कली से सीखो हुनर आशिक़ी का…-
nice
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,???
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NICE JI
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वाह
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Good
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सुन्दर रचना
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