माना तेरे काफ़िलो में शामिल नहीं हुए।
पर ऐसा न था की हम मंजिल नहीं हुए।।
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इक उम्र गुजरी यूँ ही ख्वाबो ख्यालों में।
कुछ देख न पाएं कुछ हासिल नहीं हुए।।
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जिंदगी ने दी है जिंदगी तो शुक्रिया करो।
क्या करें अफ़सोस हम क़ामिल नहीं हुए।।
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चंद लफ़्जो में कैसे लिखें अधूरी दास्तान।
यूँ कहें हम कश्ती थे जो साहिल नहीं हुए।।
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जानते थे जीत के भी हार हम ही जाएंगे।
इसलिए उनके कभी मुक़ाबिल नहीं हुए।।
@@@@RK@@@@
माना तेरे काफ़िलो में शामिल नहीं हुए।
Comments
5 responses to “माना तेरे काफ़िलो में शामिल नहीं हुए।”
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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Good
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वाह
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सुन्दर रचना
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