इश्क का बुखार बड़ा ही लज्जतदार।
आत्मा पर हो जाता एक जुनून सा सवार।
कर देता अच्छे खासे इंसान को बेकार।
हंसता खेलता इंसान लगने लगता बीमार
मीठा जहर यह बड़ा ही असरदार।
पीना हर कोई चाहे,
चाहे जमाने की पड़े मार।
इश्क एक बुखार
Comments
8 responses to “इश्क एक बुखार”
-

Wahh
-

आभार
-
-
Kya baat he
-

Thank you
-
-

बहुत खूब
-

Aabhar
-
-

वाह
-

Aabhar
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.